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आखिर क्यों 60 चीनी विद्वान सीख रहे है संस्कृत भाषा

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बीजिंग के बुद्धिस्ट इंस्टीट्यूट में 60 चीनी विद्वानों ने संस्कृत भाषा पढ़ने के लिए अपना नामांकन कराया है। भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत, चीन में काफी लोकप्रिय हो रही है। माना जा रहा कि वे 60 चीनी विद्वान योग और धर्म को बेहतर तरीके से समझने के हेतु संस्कृत भाषा को सीखना चाहते हैं।

इन विद्वानों को 300 लोगों के समूह में से चुना गया है और इस समूह में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान शामिल है जैसे योगा सिखाने वाले, परफॉर्मर, पर्यावरण संरक्षक, मैकेनिकल डिजाइनर, होटल मैनेजमेंट आदि।

पूर्वी चीन के हांगजोऊ बुद्धिज्म इंस्टीट्यूट में इन विद्वानों को संस्कृत का अध्ययन कराया जाएगा। यह अध्ययन छह दिन तक चलेगा और इस दौरान संस्कृत भाषा पढ़ने एवं लिखने पर खास ध्यान दिया जाएगा।

पीकिंग यूनिवर्सिटी (चीन स्थित) में संस्कृत भाषा के लिए अलग से एक विभाग है जिसमें 60 से ज्यादा छात्र संस्कृत भाषा का अध्ययन करते हैं। जी जियालिन (जानेमाने इंडोलॉजिस्ट) को पद्मश्री से भी नवाजा गया संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए।

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस एलान करने के पश्चात चीन के लोगों में संस्कृत भाषा को सीखने की इच्छा ज्यादा बढ़ गयी।

6 दिन संस्कृत का अध्ययन करने के लिए कई लोगों ने अपने-अपने कार्यस्थल पर ओवरटाइम किया और अवकाश लिया है। एक तरफ कुछ लोगों ने रात पाली में काम करना शुरू कर दिया है (क्योंकि यह कक्षा दिन में होने वाली है), वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने अपनी छुट्टियों का उपयोग किया जो उन्हें वर्ष में मिलती है।

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