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क्या विभीषण की नाकामी के कारण हुआ था श्रीराम- रावण युद्ध?

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श्रीराम- रावण युद्ध का मुख्या कारण आज सभी जानते है। रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था इसलिए यह युद्ध शुरू हुआ पर बहुत से लोग यह नहीं जानते कि विभीषण भी इस युद्ध के बहुत बड़े पात्र है।

दरअसल जब त्रैतायुग में रावण ने सीता को हर लिया था तब श्रीराम की सेना रावण से युद्ध करने के लिए तैयार हो रही थी।

यही समय था जब लंकापति (रावण) के छोटे भाई विभीषण ने तय किया कि वह अपने भाई के विचारों में परिवर्तन जरुर लाएँगे ताकि वह बच सकें।

जब विभीषण रावण के पास पहुंचे तो वहां भवन में वेदों का पाठ हो रहा था।

उस समय विभीषण अपने भाई रावण के सामने हाथ जोड़कर खड़े हुए और कहने लगे की लंका में तब से अपशकुन हो रहे है जब से आप सीता जी को यहाँ ले आये है। कृपया करके उन्हें सम्मान सहित अपने पति के पास लौटा दीजिये अन्यथा लंका को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा पाएगा।

अब इसे विभीषण की नाकामी कह लीजिये (कि वह अपने भाई को समझा नहीं पाया) या रावण की मूरखता कि वह विभीषण कि बात को समझ ना पाया।

रावण ने विभीषण की बात तो नहीं मानी पर ऐसी बातें सुनकर उसका मन जरुर अशांत हो गया और दूसरे दिन उसने मंत्रीपरिषद को बुला लिया।

रावण ने खुद उल्लेख किया कि वह अपने क्रोध और कामवासना को काबू नहीं कर पा रहे थे इसलिए उन्होंने निरंतर अपने मंत्रियों की सलाह ली जिससे उन्हें काफी शान्ति मिली।

रावण ने कहा कि न ही वह सीता को लौटा सकता और न ही उनके प्रति अपनी भावनाओं को बदल सकता। वह हार मानने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं था।

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